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आखिरकार मिल गया टिड्डियों को आगे बढ़ने से रोकने का तरीका, होगा पूरी तरह खात्मा


आखिरकार मिल गया टिड्डियों को आगे बढ़ने से रोकने का तरीका, होगा पूरी तरह खात्मा
   
प्रदेश में मानसून आने से पहले टिड्डी दल के अंडों को पूरी तरह से खत्म करना आवश्यक है वरना ये समस्या बड़ा रूप ले सकती है.


कोटा: जिस तरह कोरोना वायरस पूरे प्रदेश में पैर पसार रहा है, उसी प्रकार टिड्डी दल भी प्रदेश के हर जिले में अपनी दस्तक दे रहा है. टिड्डी दल ने अब तक राजस्थान के कई जिले अपनी चपेट में ले लिए हैं और अपना प्रकोप बरपाया है. 


अब टिड्डी दल का प्रकोप कोटा में भी देखने को मिल रहा है. कोटा के दादाबाड़ी, रावतभाटा रोड, वल्लभनगर, एरोड्रम सर्किल, नयापुरा सहित के जगह पर टिड्डी दल के हमले की खबर सामने आई है.


टिड्डी दल राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में अपना असर दिखा चुका है. राजस्थान के 22 से ज्यादा जिलों में यह दल तकरीबन 95000 हेक्टेयर से ज्यादा फसलों को चट कर चुका है. राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में भी टिड्डियों का आतंक सामने आया है.  राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में टिड्डी दल की जुलाई में मानसूनी हवाओं के साथ दोबारा वापसी होने की संभावना है. 



कृषि आयुक्त ओम प्रकाश की मानें तो टिड्डी दल पाकिस्तान से आ रहे हैं. कृषि विभाग के अनुसार जैसे-जैसे जिलो में टिड्डी प्रकोप बढ़ता जा रहा है, वैसे ही संसाधनों में बढ़ोतरी की जा रही है. खेतों में ट्रैक्टर दमकल, ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है. टिड्डियों को मारने के लिए तकरीबन 50 लीटर कीटनाशक का छिड़काव करवया जा चुका है, लेकिन टिड्डियों के खात्मे के लिए ये नाकाफी हैं. 


प्रदेश में मानसून आने से पहले टिड्डी दल के अंडों को पूरी तरह से खत्म करना आवश्यक है वरना ये समस्या बड़ा रूप ले सकती है क्योंकि मानसून के बाद किसान खेतों में फसल बोना शुरू कर देता है. ऐसे में टिड्डी दल फसल को खराब कर देंगे और उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर देंगे. टिड्डियों को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि जहां इनका ब्रिगेड सेंटर है, वहीं पर गहरा गड्ढा खोदकर इन के अंडों को दबा दिया जाए ताकि ये आगे नहीं बढ़ पाए. 


ऐसा माना जाता है कि एक वयस्क मादा टिड्डी अपने 3 महीने के जीवन चक्र में 3 बार करीब 90 अंडे देती है, ऐसे में अगर यह अंडे नष्ट नहीं हुए तो प्रति हेक्टेयर में 4 से 8 करोड़ तक टिड्डियां प्रति वर्ग किलोमीटर में पैदा हो सकती हैं.

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